बेंगलुरु में आयोजित विवेकदीपनी महासमर्पणे कार्यक्रम में भाग लिया।
वेदांत भारती के प्रयासों से एक ही स्थान पर, एक ही स्वर में हो रहा मंत्रोच्चार, पूजा के एक अभिन्न चक्र को निर्मित करता है जो तन, मन और आत्मा को न केवल शक्ति देता है, अपितु कई प्रकार के दोषों से भी मुक्त करता है।
मैं वेदांत भारती को साधुवाद देता हूँ कि उन्होंने लाखों बच्चों के जीवन में वेदों और उपनिषदों के संदेश को इतनी सरलता से पहुंचाया है। हमारे वेदों, उपनिषदों, शास्त्रों और पौराणिक साहित्य में जो ज्ञान भरा पड़ा है, उसको बच्चों को देना और उनके जीवन को लक्ष्य के प्रति समर्पित करना बहुत जरूरी है।
भगवान् आदिशंकराचार्य रचित प्रश्नोत्तर रत्नमालिका के संक्षिप्त स्वरूप विवेकदीपनी से बच्चों को परिचित करना और इसके ज्ञान को बच्चों तक पहुंचाना - इससे बड़ा प्रेरणादायी काम कुछ और हो ही नहीं सकता। मैं बच्चों से कहना चाहता हूँ कि आप रत्नमालिका के श्लोकों के अर्थ को इसके स्थूल स्वरूप के बजाय इसके गूढ़ उत्तर को अपने गुरुजनों से ग्रहण करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो आपको अपने जीवन में गलत रास्ते पर जाने की कोई संभावना ही नहीं बनती, जीवन में निराशा और अकर्मण्यता के आने की भी कोई संभावना नहीं बनती और समग्र सृष्टि के कल्याण के लिए अपने जीवन को समर्पित करने का भाव भी इसी से जाग्रत होता है।
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